Seoni News: सिवनी में उठी FIR की मांग, पैगंबर साहब पर आपत्तिजनक टिप्पणी से भड़का आक्रोश

सोशल मीडिया पर एक महिला द्वारा पैगंबर हजरत मुहम्मद (सल्ल.) और उम्मुल मोमिनीन हजरत आयशा (रज़ि.) के खिलाफ कथित रूप से की गई अपमानजनक टिप्पणी ने सिवनी जिले के मुस्लिम समाज में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। मामला तब और तूल पकड़ गया जब शुक्रवार को दत्ता नगर स्थित 'गरीब नवाज फाउंडेशन' के पदाधिकारी बड़ी संख्या में सिवनी थाने पहुंचे और थाना प्रभारी को औपचारिक ज्ञापन सौंपकर आरोपी नाजिया इलाही खान के खिलाफ FIR दर्ज करने की कड़ी मांग की।

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Seoni News: सोशल मीडिया पर एक महिला द्वारा पैगंबर हजरत मुहम्मद (सल्ल.) और उम्मुल मोमिनीन हजरत आयशा (रज़ि.) के खिलाफ कथित रूप से की गई अपमानजनक टिप्पणी ने सिवनी जिले के मुस्लिम समाज में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। मामला तब और तूल पकड़ गया जब शुक्रवार को दत्ता नगर स्थित ‘गरीब नवाज फाउंडेशन’ के पदाधिकारी बड़ी संख्या में सिवनी थाने पहुंचे और थाना प्रभारी को औपचारिक ज्ञापन सौंपकर आरोपी नाजिया इलाही खान के खिलाफ FIR दर्ज करने की कड़ी मांग की।

फाउंडेशन के अध्यक्ष मोहम्मद सुलेमान कादरी के नेतृत्व में सौंपे गए इस ज्ञापन में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया गया है कि नाजिया इलाही खान ने सोशल मीडिया और अन्य सार्वजनिक मंचों पर पैगंबर साहब के संबंध में ऐसे वक्तव्य दिए, जो न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करते हैं बल्कि देशभर के करोड़ों मुस्लिम नागरिकों के स्वाभिमान पर सीधी चोट हैं। संगठन ने अपने आरोपों के समर्थन में वीडियो, ऑडियो क्लिप और स्क्रीनशॉट जैसे ठोस इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी पुलिस को सौंपे।

सांप्रदायिक सौहार्द पर मंडराया खतरा — फाउंडेशन ने जताई गंभीर चिंता

ज्ञापन में केवल FIR की मांग तक बात सीमित नहीं रही। फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने प्रशासन को गंभीरता से आगाह किया कि इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना और उकसावे भरे बयान अलग-अलग समुदायों के बीच नफरत की दीवार खड़ी कर सकते हैं और सार्वजनिक शांति व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। पदाधिकारियों ने भारतीय संविधान का हवाला देते हुए कहा कि हर नागरिक को अपने धर्म का सम्मानपूर्वक पालन करने का मौलिक अधिकार प्राप्त है और किसी भी धर्म के पूजनीय व्यक्तित्व का अपमान न केवल असंवैधानिक है बल्कि कानूनी दृष्टि से भी दंडनीय है।

किन धाराओं में FIR की मांग?

कानूनी कार्रवाई की बात करें तो संगठन ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 196, धारा 299, धारा 302 और धारा 352 के साथ-साथ साइबर एक्ट के तहत भी कठोर और निष्पक्ष कार्रवाई अमल में लाई जाए। ये धाराएं समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, सार्वजनिक शांति भंग करने और जानबूझकर अपमानजनक कृत्य करने से संबंधित हैं।

डिजिटल साक्ष्य ‘Preserve’ कराने की अपील

इसके अलावा ज्ञापन में एक और अहम मांग यह रही कि विवादित वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट को पुलिस तत्काल ‘Preserve’ कराए और उनकी फोरेंसिक जांच सुनिश्चित करे ताकि साक्ष्यों से किसी भी स्थिति में छेड़छाड़ न हो और वे नष्ट न किए जा सकें। ज्ञापन की प्रति सिवनी के पुलिस अधीक्षक और अनुविभागीय पुलिस अधिकारी को भी भेजी गई है।

महिलाओं की भागीदारी ने दिया आंदोलन को नया आयाम

थाने पर हुई इस पूरी कार्रवाई की एक खास बात यह रही कि ज्ञापन सौंपने के दौरान मोहम्मद सुलेमान कादरी के नेतृत्व में बड़ी तादाद में मुस्लिम समाज के लोग एकत्र हुए, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी भी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। समाज के इस एकजुट प्रदर्शन ने प्रशासन को साफ संदेश दे दिया कि इस मामले को अनदेखा करना संभव नहीं होगा।

अब सबकी निगाहें सिवनी पुलिस पर टिकी हैं। क्या प्रशासन समय रहते कार्रवाई करेगा या मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा? आने वाले घंटों में पुलिस का रुख ही इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा।

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